मंगलवार, 19 नवंबर 2019

भारत में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा शिक्षा तंत्र : डॉ.रमेश पोखरियाल ‘निशंक’


संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक संगठन में भाषण देते हुए श्री निशंक 
मुझे लगता है कि हमें अपने छात्रों को यह सिखाना होगा कि स्थिरता केवल पर्यावरण के बारे में ही नहीं है बल्कि हमें समग्र विकास के विषय में सोचना है। एक समाज के रूप में, एक राष्‍ट्र के रूप में हमारे कार्यों से प्रकृति के साथ सामंजस्य कैसे प्राप्त किया जा सकता है, इस बारे में हमारे मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रश्न का उत्तर हर कीमत पर ढूंढना ही है
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  सदियों  पुरानी अजर अमर भारतीय संस्कृति ने संपूर्ण विश्व को परिवार माना है।" अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम्| उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्|| " संपूर्ण  दुनिया  में  वसुधैव  कुटुंबकम का महान विचार लेकर भारत देश ने सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया: की परिकल्पना को  साकार करते हुए संपूर्ण मानवता के कल्याण की कामना ही की  है। हमारा चिंतन, हमारे दर्शन और हमारे मूल्‍यों में एक ही भावना परि‍लक्षित होती है कि संसार में कोई कष्ट में न रहे। एकात्म मानववाद का चिंतन कर हम ने समाज में अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचने का संकल्प लिया है l पिछड़े, दलित, उपेक्षा वर्ग तक पहुंचना हमारी सर्वोच्‍च प्राथमिकता है। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र के 74वें सम्मेलन में सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास अर्जित करने की बात की। यह मंत्र न केवल भारत के लिए अपितु विश्‍व कल्याण के लिए आवश्यक है।l
युनेस्को की साधारण सभा को सम्बोधित करते हुए श्री निशंक 

विश्व बंधुत्व,  सामाजिक समरसता, सौहार्द, परोपकार, सहिष्‍णुता,  प्रेम की  भावना को हम शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने और पुष्पित पल्लवित करने में सक्षम हैं।l शिक्षा ही वह के माध्यम है जिससे हम समग्र विकास की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं। विश्‍व के शीर्ष पर रहने का श्रेय हमें शिक्षा के माध्‍यम से ही मिला। विश्‍व गुरू भारत पुरातन काल में ज्ञान और विज्ञान का नेतृत्‍व केवल इसलिए प्रदान कर पाया क्‍योंकि उसकी शिक्षा सर्वोत्‍कृष्‍ट और मूल्‍यों पर आधारित थी। नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी विश्व विद्यालय दुनिया के विभिन्न हिस्सों से छात्रों और विद्वानों केआकर्षण का केंद्र रहा है। सदैव से ही भारत अपनी मूल्यपरक शिक्षा द्वारा वैश्विक कल्याण के साँझा उद्देश्यों को साकार करने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय के साथ एक  सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाता रहा है। आज के चुनौतीपूर्ण वातावरण में भारत विश्व के तीसरे बड़ा शिक्षा तंत्र होने के नाते 33करोड़ से ज्यादा विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य निर्माण के लिए कृतसंकल्पित हैं । देश में 1000 से ज्यादा विश्व विद्यालय हैं 45000 से ज्यादा डिग्री कॉलेज के साथ ही विश्व का सबसे युवा देश है जनसंख्याकि लाभांश के चलते वर्ष 2055  तक काम करने वाले लोगों की सर्वाधिक संख्या भारत में होगी। 

तत विकास के स्थिरता के तीन स्तंभ आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण स्थिरता और स्थायी विकास उस विकास संतुलित करने पर केंद्रित है। मुझे लगता है कि हमें अपने छात्रों को यह सिखाना होगा कि स्थिरता केवल पर्यावरण के बारे में ही नहीं है बल्कि हमें समग्र विकास के विषय में सोचना है। एक समाज के रूप में, एक राष्‍ट्र के रूप में हमारे कार्यों से प्रकृति के साथ सामंजस्य कैसे प्राप्त किया जा सकता है, इस बारे में हमारे मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रश्न का उत्तर होने हर कीमत पर ढूंढना ही है। प्रश्न का उत्‍तर ढूंढना है। "स्थिरता" की परिभाषा से अपने विद्यार्थियों को अवगत कराना हमारी सर्वोच्‍च प्राथमिकता है। यही कारण था कि जहां हमने अपने परिसरों में सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया है वहीं एक पेड़ एक छात्र अभियान चलाकर अपने परिसरों को हरित परिसर बनाने का प्रयास किया है।

म शिक्षा, विज्ञान, पर्यावरण और संस्कृति के क्षेत्र में अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग के माध्यम से शांति  के निर्माण के अपने मूल जनादेश को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित हैं। मुझे लगता है कि युगों युगों से चली आ रही हमारी शिक्षा पद्धति हमारा दर्शन,  हमारा  चिंतन और हमारा भाव सब कुछ मानवता के कल्याण के लिए केंद्रित रहता है। "असतो मा सदगमय:  असत्य से सत्य की ओर एवं तमसो मा  ज्योर्तिगमय: अंधकार  से प्रकाश की ओर प्राणी मात्र को ले जाने के लिए हम संकल्पित हैं।
मारा लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चे और नागरिक को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्राप्त हो । हम समग्र शिक्षा के माध्यम से, शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 को लागू कर समस्त भारत में बच्चों तक शिक्षा पहुँचाने का उल्‍लेखनीय कार्य किया हैI 33 वर्षों के अंतराल में हम देश के शैक्षिक क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन करने वाली नयी शिक्षा नीति लाने के लिए कृत संकल्पित हैं। हमारी नयी शिक्षा नीति गुणवत्तापरक,  रोजगारपरक,  नवचारयुक्त,  कौशलयुक्त,  सामाजिक सरोकारों से युक्त,  व्यावहारिक,  शोधपरक,  पर्यावरण की रक्षा  क्षेत्र में उल्लेखनीय रहेगी। नई शिक्षा नीति विश्व का सर्वाधिक बड़ा विमर्श मुक्त नवाचार के रूप में हुआl  भारत विश्व की सबसे बड़े सार्वजनिक लोकतांत्रिक परामर्श अभियान से,  नई शिक्षा नीति को कार्य रूप देने की ओर गतिशील है। लगभग सवा दो लाख लोगों के सुझावों इस बात का परिचायक है कि हमने शिक्षा नीति को अंतिम रूप देने के लिए सभी हितधारकों तक पहुंचने का प्रयास किया है। विद्यार्थी, अध्‍यापक, विद्यालय प्रबंधन, प्रशासक, नीति निर्माता, जनप्रतिनिधि एवं गैर सरकारी संगठनों समेत हमने हर वर्ग तक पहुचने में सफलता पायी है।
राष्ट्रीय नीति जिस का मसौदा तैयार है वह सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल साबित होगी| हमारा लक्ष्य है किआधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर शिक्षा को नवाचार युक्त गुणवत्ता परक बनाया जाए। भारत उच्च शिक्षा नीति को गुणात्मक एवं वहनीय बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। स्वयं पोर्टल के माध्यम से हम भारत के ही नहीं, बल्कि विदेशी छात्रों को भी निशुल्क उच्च शिक्षा देने के लिए प्रयासरत हैं ।यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि भारत के ही 12.3 मिलीयन छात्र स्वयं पोर्टल के तहत शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विज्ञान भारती एवं 'आरोग्यभारती' के माध्यम से हम ज्ञान के भंडार को निशुल्क बांटने  के लिए प्रतिबद्ध हैं। अफ्रीकन राष्ट्रों के साथ हमारा इस संबंध में समझौता हो चुका है।

मारी योजना है जिसके तहत समूचे विश्व के छात्र भारत में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्टडी इन इंडिया प्रोग्राम के तहत भारतकी 100 से ज्यादा सर्वोत्तम शिक्षण संस्थाएं विश्व भर में छात्रों के लिए आकर्षक गंतव्य स्थल के रूप में उपलब्ध हैं |

शिक्षा के माध्‍यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण के लिए विद्यार्थियों को जागरूक करना हमारी प्राथमिकता है। भाषा राष्‍ट्र की अभिव्‍यक्ति है और भाषा के बगैर राष्‍ट्र गूंगा है। भाषा के महत्‍व को समझते हुए नई नीति के माध्‍यम से हम देश की हिंदी, संस्कृत सहित सभी भारतीय भाषाओं को संरक्षित, पुष्पित एवं पल्लवित करने में जुटे हैं। l
भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी की मदद से संयुक्‍त राष्‍ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कटिबद्ध है। इस संदर्भ में भारत के माननीय यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 103वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में ' इंडिया टेक्नोलॉजी विजन 2035' का अनावरण किया हैमानव सभ्यता हमारे आधुनिक जीवन शैली को बनाए रखने के लिए संसाधनों का उपयोग करती है। 
मानव इतिहास में अनगिनत उदाहरण हैं जहां सभ्‍यता ने विकास हेतु पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। हमें क्षति और विनाश से बचाते हुए इस बात को ध्यान में रखना है कि हम प्राकृतिक दुनिया के साथ कैसे तालमेल बिठा सकते हैं। ब्रिटिश काल के दौरान शुरू हुई मूल्‍यों की गिरावट का लम्‍बे समय तक निरंतर क्षरण होता रहा। यह हमारा सौभाग्‍य रहा कि स्‍वामी विवेकानंद, महात्‍मा गॉंधी, सुभाष चन्‍द्र बोस सरीखे सिद्धांतों और मूल्य युक्‍त नेतृत्‍व ने हमारा मार्गदर्शन किया। उन्होंने सत्य और अहिंसा के अपने शक्तिशाली मूल्यों के साथ भारत को अपनी ताकत वापस पाने में मदद की। आजादी के 70 वर्षों के बाद प्रभावी प्रबंधन और अस्तित्व के लिए इन मूल्यों पर वापस जाने की आवश्यकता है। 
मय-परीक्षणित मूल्यों को पुनर्जीवित करने और सत्य, अहिंसा, त्याग, विनम्रता, समानता आदि जैसे मूल्य इस अशांत परिदृश्य में आशा की नई किरण जगाते हैं।मानवता के लिए शिक्षा को संयुक्त रूप से बदलने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय साझेदारी की अनूठी पहल को साकार करने के लिए एवं मानवता के लिए शिक्षा को संयुक्त रूप से बदलने के लिए मैं वैश्विक साझेदारी की आशा करता हूं। आज हम परिवार के अंदर बंट गए हैं, खुद को कंप्यूटर तक सीमित कर लिया है और स्मार्टफोन को अपनी दुनिया बना ली है. इन जंजीरों से निकलने में बापू के विचार हमारे लिए मददगार साबित हो सकते हैं
आज के युग में भारत  इस तरह की पहल शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, जल और स्वच्छता के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ मिलकर करना चाहता है। मैं सभी सम्मानित देशो से अनुरोध करता हूं कि हम सब मिलकर के सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करे | वैसे भी हमारे ग्रन्‍थों में कहा गया है कि 
माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्यासंपूर्ण धरा को हमने माँ के समान माना है उसको सुरक्षित और संरक्षित करने हेतु हम हमेशा संकल्पित रहेंगे।l

भारत सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री एवं सुप्रसिसष साहित्यकार कवि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’द्वारा हाल ही में UNESCO में दिए गए भाषण के अंशों पर आधारित 
-आशीष अग्रवाल