रविवार, 5 जनवरी 2014

ऐसी तैसी आप की,जो आमआदमी को देखा !

ड़ी मुसीबत है। भाई लोग आम आदमी के पीछे पड़  गए हैं! आम आदमी के लिए ही तो लाठी जूते ,झिड़की,गाली,खायीं और ना जाने  क्या-क्या सुनना  पड़ा। सिर्फ एक ही बात को लेकर संघर्ष था कि कैसे आम आदमी का स्तर ऊपर को उठे ,उसका दर्जा बढे,उसकी हैसियत बने,अब तक नेताओं की सरकार होती थी,अब आम आदमी की सरकार बने। अपना तो कुछ था ही नहीं।  जो भी था छोड़-छाड़कर आम आदमीबन गए। लख़टके की नौकरी छोड़ दी। घर- बार तक नहीं देखा। देखा नहीं,बड़े बड़े ऋषि मुनि लोग मैदान छोड़ गए थे। भेस बदल कर।खाली भेस थोड़े ही बदला ,सब कुछ बदल गया था। चुटिया बना ली थी दुपट्टे के साथ।

ब जैसे-तैसे आम आदमी की सरकार बनी, और कुछ सहारा मिला, किसी ने अपना हाथ दिया, आम आदमी का हाथ थामा। कुछ आस बंधी कि अब आम आदमी भी राज करेगा ,फिर पीछे पड गये हैं। अब तक एक मुहावरा सुना था कि हाथ धोकर पीछे पड़ा जाता है,जब सुना कि कोई किसी बड़े नेता के कि पीछे पड़ा, तो यही कहा कि हाथ धोकर पीछे पड़ गया है मगर यहाँ तो हद ही कर दी है भाई लोगों ने,बिना हाथ पैर धोये, सुबह सुबह ही चले आते हैं और बस कैमरे ऐसे लगा देते कि बस अब मुह में घुसेड़ देंगे, दूर ऐसे खड़े  होगे कि जैसे बस गोली चला ही देंगे। आम आदमी को ताकने के अलावा कोई काम नहीं बचा। फिर आम आदमी की मुसीबत ,अब आखिर जाये तो जाए कहाँ आम आदमी?

सैकड़ों हज़ारों गज के मकानो में घास उगा रहे उन बुड्ढों को नहीं देख रहे कि मकान किराए पर उठाये हैं और ना जाने वहाँ क्या-क्या हो रहा है। जिन्होंने कभी अपना बंगला पूरा घूम कर देखा तक नहीं उनमे कभी घुसेतक नहीं। और यहाँ आम आदमी को बंगला नहीं घर मिला ,आम आदमी से पहले उसमे भाई लोग घुस गए। बस शुरू बवाल। धे खबर पे खबर। इनसे पूछे कोई -कहाँ रहेगा आम आदमी?फुटपाथ पे?और ये सब बंगलों में। तो फिर कहाँ हुआ परिवर्तन। तब तो  होगा ही नहीं कुछ?

भाई लोग लोग ये भी नहीं समझ रहे कि आम आदमी कैसे बना और उसका का क्या-क्या अधिकार है?जब आम आदमी भीख मांगे तब आम आदमी गरीब ,भूखा  रहे तो भूखा, लुटे पिटे तो शोषण और ज्यादती का शिकार, यही तो कहा जाएगा और इसी के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। अब आम आदमी कार में बैठा तो वही कार  तो आम आदमी की कहलायेगी जिसमे वह बैठा ,तब इस पर भी बवाल कि आम आदमी की कर इनोवा नहीं नैनो है,कोइं तुक है भला? जब फुटपाथ पर पड़ा था आम आदमी तब कोई नही बोला। आम आदमी की जगह उस कोठी में है जिसमे में है वो रहते हैं? किसी खली पड़े बंगले में तक घुसना तो दूर आँख उठाकर देखने तक नहीं दिया।

ल को कहेगे आम आदमी क्या खाये और क्या न खाये?अब तक जो राज कर रहे थे कितना कितना खा गए तब कोई नहीं बोला,आम आदमी न कुछ खा ले, बस यही चिंता है! ऐसे तो आम आदमी कुछ खा ही नहीं सकता?भूखा मरेगा? मतलब आम आदमी भख से ही मरेगा?और बाकी सब खा कहकर स्विस बैकों में निकालेंगे? आम आदमी को पासपोर्ट भी नहीं लेने देंगे? सब जगह निगाह रहेंगे कि अब कहाँ गया ? इत्ते बड़े बड़े घोटाले हजम,भूल गए !अब आम आदमी की फिर ऐसी तैसी !ठीक  किया जो पहले दिन से ही पाबंदी लगा दी,दफ्तर में घुसन पे।हद हो गयी !अब आप आम आदमी के पीछे पड़ गए। सरकार  क्या बनी मानो  गुरुद्वारा खुल गया !  ऐसी तैसी आपकी,जो आम आदमी को देखा ,अब आम आदमी लावारिस नहीं उसकी अपनी सरकार है। लाल बत्ती हम नहीं लगाएंगे,मगर अब आम आदमी लगाएगा। महँगी कारों में अब आम आदमी चलेगा  खबरदार जो अब आप ने आम आदमी को देखने कि जुर्रत
की आगे से !

कोई टिप्पणी नहीं: