
रमेश पोखरियाल को भाजपा ने उत्तराखण्ड राज्य का नया मुख्यमंत्री बना कर एकतरह से इस राज्य में जहंा अपने बिखरतेे हुए संगठन को फिर से एकजुट करने की कोशिश की है, वहीं इस युवा नेता के हाथ में राज्य की कमान सौंपकर देश के युवाओं को यह संदेश भी दिया है कि भाजपा में उनके लिए आपार संभावनाएं हैं। पार्टी सिर्फ बूूढों और बुजुर्गों के बस्तों में कैद नहीं है। रमेश पोखरियाल शुरू से ही अति महत्वाकांक्षीऔर एक तरह से जादुई व्यक्तित्व के धनी हैं। सब को साथ लेकर चलने की प्रवृति और नेतृत्वृ क्षमता जैसे गुण उन्हें विधाता नेें जन्म से ही दिये हैं। हर किसी से सीखने की प्रवृति उनका एक ऐसा गुण है जो हर दिन उन्हें जीवन में सफलता के एक और पायदान पर खड़ा करता है। खास बात यह है कि रमेश पोखरियाल का आदर्श कोई एक व्यक्तिव्व नहीं है। नियमित लेखन, साहित्य और सृजन उनकी रग-रग में समाया है, फिर भी इस मामले में जहां उन्होनेें भाजपा के वयोवृद्ध नेता अटल बिहारी बाजपेयी से प्रेरणा ली हैं। वहीं राजनीति के क्षे़त्र में उन पर कांग्रेस के नेता नारायण दत्त तिवारी के व्यवहार कुशलता जैसे आकर्षण पैदा करने वाले व्यक्तित्व का गहरा असर पड़ा है। उत्तराखण्ड में जब भारतीय जनता पार्टी 2002 चुनाव हार गई और कांग्रेस सत्ता में आई तो नारायण दत्त तिवारी के मुख्यमंत्रित्व काल में निशंक ने श्री तिवारी की कार्यप्रणाली और व्यक्तित्व का बड़ी बारीकी से अध्ययन और मनन किया। हालांकि तब हर किसी राजनेता की तरह उनका सपना रहा होगा कि राज्य के मुख्यमंत्री पद पर पहुंचा जाएं, तब उनको खुद यह अंदाजा नहीं होगा कि विधाता इतनी जल्दी उनके लिए अवसर पैदा कर देगा और आज वह दिन आया जब निशंक को भारतीय जनता पार्टी उत्त्राखण्ड के विधानमण्डल दल का नेता चुन लिया गया और उन्ह अब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना बाकी है। वह किस व्यक्तित्व से प्रेरित होकर उत्तराखण्ड पर राज करेंगें, इसकी बानगी उन्होंने अपने पहले ही आधिकारिक वक्तत्य में दे दी है। उन्होंने खुद को उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री नहीं ’मुख्य सेवक‘ का है’, नारायण दत्त तिवारी जो इस समय आंध्र प्रदेश के राज्यपाल हैं, इससे पूर्व पांच साल तक उत्तराखण्ड के एक ऐसे मुख्यमंत्री रहे हंै जिनके राज में देश भर में उत्तराखण्ड के प्रति एक विशेष आकर्षण बना रहा। राज्य का चतुर्मुखी विकास हीं नही हुआ बल्कि विकास का ऐसा आधार भूत ढांचा तैयार हुआ, जिसमें सरकार और सरकारी क्रियाक्लापों के तौर तरीके भी शामिल हैं, की भी एक मजबूत बुनियाद पड़ी, तब से पांच साल तक नारायण दत्त तिवारी ने खुद को राज्य का मुख्य सेवक ही कहा। और आज रमेश पोखरियाल निशंक ने भी अपने लिए इसी संबोधन का प्रयोग कर अपने तौर तरीकों का एक संकेत दे दिया है। जिसे समझने में भारतीय जनता पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।
डाॅ। रमेश पोखरियाल ‘निशंक
सन् 1991, 1993, 1996 में कर्णप्रयाग विधानसभा से लगातार तीन बार उत्तर प्रदेश के विधान सभा सदस्य निर्वाचित। सन् 1997 में पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार में उत्तरांचल विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री। सन् 1998 में उत्तर प्रदेश सरकार में संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री।सन् 2000 में उत्तराखण्ड सरकार में वित्त, ग्राम्य विकास, चिकित्सा शिक्षा, नियोजन, राजस्व, पेयजल, व्यापार कर सहित 12 विभागों के मंत्री वर्तमान में उत्तराखण्ड सरकार में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आयुष एवं आयुष शिक्षा, भाषा तथा बायोटेक मंत्री।
साहित्यक यात्राकविता संकलन समर्पण, नवांकुर, मुझे विधाता बनना है, तुम भी मेरे साथ चलो, देश हम जलने न देंगे, जीवन पथ में, मातृभूमि के लिए, कोई मुश्किल नहीं, ए वतन तेरे लिए।खण्ड काव्य प्रतीक्षा।उपन्यास मेजर निराला, वीरा, पहाड़ से ऊंचा, निशान्त।कहानी संकलनऽ बस एक ही इच्छा, क्या नहीं हो सकता, रोशनी की एक किरण, खड़े हुए प्रश्न, विपदा जीवित है, मेरे संकल्प।सम्पादन मेरी व्यथा, मेरी कथा (शहीद के पत्रों का संकलन)एन इलवियक एन्ना बात्थु (खड़े हुए प्रश्न का तमिल अनुवाद), तायनाडे उनक्कागड़ (ऐ वतन तेरे लिए का तमिल अनुवाद), जन्मभूमि (ऐ वतन तेरे लिए का तेलगू अनुवाद), द क्राउड बीयर्स विटनेस (भीड़ साक्षी है का अंग्रेजी अनुवाद), डू एण्ड इश (तुम और मै का जर्मन अनुवाद), नूर एन वंस्क (बस ही इच्छा का जर्मन अनुवाद), प्रतीक्षा (प्रतीक्षा का गढ़वाली अनुवाद)।शीघ्र प्रकाश्य कृतियां हिमालय का महाकुम्भ: नन्दादेवी राजजात, चक्रव्यूह में घिरा हुआ (कविता संग्रह), धरती का स्वर्ग उत्तराखण्ड, लोग क्या कहेंगे (कहानी संग्रह)।
सम्मान :-राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपतियों शंकर दयाल शर्मा तथा ज्ञानी जैल सिंह द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे अब्दुल कलाम द्वारा राष्ट्रपति भवन में ‘साहित्य गौरव’ दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा ‘साहित्य भारती, ‘साहित्यचेता’ मुम्बई अन्तर्राष्ट्रीय मुक्त विश्व विद्यालय, कोलम्बो द्वारा आयुष क्षेत्र में विशेष सम्मान योगदान हेतु ‘डाॅक्टर आॅफ नई दिल्ली में इन्टरनेशनल फ्रैंडशिप सोसायटी द्वारा ‘भारत गौरव’ सम्मान।ऽ दून सीनियर सोसायटी द्वारा ‘प्राइड आॅफ उत्तराखण्ड’ सम्मान। हैम्बर्ग जर्मनी में व्याख्यान तथा सम्मान।ऽ अनेकानेक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित
डा. रमेश पोखरियाल , स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, आयुष, आयुष शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, बायोटेक, भाषाजन्म 1987 में उत्तांचल प्रदेश संघर्ष समिति के केन्द्रीय प्रवक्ता बने कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गये। विधानसभा के मध्यावधि चुनावों में दूसरी बार इसी क्षेत्र से जीतकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे। तीसरी बार वर्ष 96 में क्षेत्र से विधायक चुने गये। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार में उत्तरांचल विकास विभाग के काबिना मंत्री बनाए गए। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद भाजपा सरकार में राजस्व एवं वित्त मंत्री बनाए गए। थलीसैंण विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आए और खण्डूड़ी सरकार में चिकित्सा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, आयुष, आयुष शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, बायोटेक, भाषा मंत्री बनाये गये।
5 टिप्पणियां:
निश्शंक जी को मैं कम से कम एक दशक से तो जानता ही हूँ. सादगी, संयम, सदाशयता और सरलता की प्रतिमूर्ति निश्शंक जी के कुछ साक्षात्कार और कुछ वाकये मुझे आज भी याद हैं जिन पर मैं भी लिखना चाहूँगा. निश्शंक जी के बारे मैं इतना बढ़िया और सारगर्भित आलेख अभी तक नहीं पढ़ा है मैने.
बहुत अच्छा ब्लॉग है.. बधाई.
अशोक भाई आपका आभारी हूँ. आप भी लिखें साइड स्टोरी खुला मंच है. आपका और सभी मित्रों का स्वागत है.
आशीष अग्रवाल
वाहियात सी उम्मीद है कि डॉक्टर रमेश पोखरियाल जैसा सीधा आदमी उत्तराखंड के खुर्रांट सियासतदानों को काबू में कर के वहां भाजपा के लिये किसी तरह की तरक्की की फसल बो-काट सकता है. भाजपा जैसे लड़ रही है उसे देखते हुये तो निश्शंक साहेब की राह आसान नहीं लगती.
अनजान मित्र, क्षमा कीजियेगा. पहाड़ की राजनीती खुर्रांट राजनेताओं के हाथों में तो बिलकुल नहीं है. और मैं यह भी नहीं मानना चाहूँगा कि निश्शंक जी 'वैसे' सीधे हैं जिनके हाथों से परिस्थितियां फिसल सकती हैं.
Great work Ashish ji
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