
चार राज्यों के चुनावों के बाद सतह पर पहुंची कांग्रेस में भीतरी संकेत अब तूफ़ान का रूप ले रहा है। विधान सभा चुनावों में औंधे मुह गिरी कांग्रेस में अब नया संकट दस्तक देचुका है। लोकसभा मे तेलंगाना और कंग्रेस के चार सांसदों के अविश्वास प्रस्ताव के साथ इसकी शुरआत हो चुकी है। जहाज कि रफ़्तार और चाल किसी बड़े खतरे की ओर संकेत कर चुकी है। भगदड़ तो मचेगी । दिल्ली की राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले जानकरों का तो यहाँ तक संकेत हैं कि युवराज और राजमाता के खिलाफ ताल ठोकने की भी तैयारी भी हो चुकी है। संकेत सीधे सीधे पार्टी के विभाजन की और है। पके और तपे हुए कांग्रेसी अब युवा ब्रिगेड के खिलाफ ताल ठोकने जा रहे हैं। इनमे मध्य प्रदेश उत्तरप्रदेश के कुछ खांटी नेताओं के अलावा युवराज की युवा ब्रिगेड से जले नेताओं के अलावा कम से कम छह केंद्रीय मंत्री भी हैं,जिसमे दो यूपी के हैं। यह भी अंत समय पर बागियों के साथ खड़े दिखाई देंगे।
पता तो यह भी चला है इस बगावत को हवा देने में उत्तरप्रदेश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव का भी वरदहस्त है। कारन साफ़ है कि अभी जो तस्वीर सामने आयी है उसमे सपा को अपना चेहरा बहुत धुंधला नज़र आया है,इस तस्वीर को निखारने के लिए फिलहाल उसके पास कांग्रेस में तोड़फोड़ और बगवात ही एक ऐसा अंतिम विकल है कि यही दांव सपा को उम्मीद कि वह किरण दिखा सकता है जिसमे कि उसको अपनी नाव कम से यूपी में तो सुरक्षित पार लगाती दिखायी देगी।दिल्ली में सरकार बनाने को आतुर आप की मदद का रास्ता भी अंत में कांग्रेस में तोड़फोड़ कि और जाता है और आज का अरविन्द केजरीवाल का आक्रामक बौर बगावत का आह्वान करने वाला बयान भी इसी बात का संकेत है।समाजवादी पार्टी के मुखिया बीजेपी के खिलाफ बोलने का खामियाज़ा अपने शुरूआती दौर में काफी भुगत चुके हैं और थोडा बहुत नहीं ,उसकी कीमत उन्हें सता से अलग रहने के साथ धुर विरोधी बीजेपी को न केवल सत्ता भी सौपनी पड़ी यही नहीं इसके बाद बसपा शासन में उन्हें क्या क्या नहीं झेलना पड़ा! उस दौर में सपा मुखिया को क्या-क्या दिन देखने पड़े, उन्हें वह भूल नहीं सकते और फिर याद भी नहीं करना चाहते हैं। पिछले लम्बे और कटु अनुभव से सबक लेते हुए नेता जी किसी भी कीमत पर अब भाजपा और उसके प्रधानमन्त्री पद के उम्मीदवार के खिलाफ एक भी शब्द बोलकर नेता जी बर्र के छत्ते में हाथ नहीं डालना चाहते। वह जानते ही हैं कि जिस संगठित प्रचार अभियान के तहत भाजपा और उसके अनगिनत सहयोगी किस तरह से सोशल मीडिया पर राहुल गंधी की धज्जियाँ उडा चुके हैं और अभी हाल के चार राज्यों के चुनावों में कांग्रेस किसे औंधे मुह गिरी है। ऐसे में उनके पास सिवाय कांग्रेस में छेद करने औए उसके जले फुके तपे घाघ नेताओं को हवा पानी देने के अलावा और कोई चारा नहीं है। कांग्रेस के पुराने सहयोगी उनके पास हैं ही। अरविन्द केजरीवाल को उत्तर प्रदेश में अपना वजूद बनाने के लिए आखिर सपा के ही तो खिलाफ मोर्चा लगाना होगा ! इस तरह राजनीति के माहिर और घाघ खिलाड़ी मुलायम सिंह यादव एक ही तीर से कई निशाने साध लेंगे,वह अच्छी तरह जानते हैं कि केजरीवाल का अगल पड़ाव यूपी ही है।
