दो बातें समझ में नहीं आ रहीं है एक कांग्रेस का अन्ना के अनशन के तुरंत बाद जनलोकपाल बिल पास करवा देना और दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल की सरकार को बिना शर्त समर्थन !
अब केजरीवाल और कांग्रेस एक साथ!
अन्ना भी कांग्रेस से खुश,तो आखिर कोई वजह तो ऐसी है नहीं कि अन्ना बेवजह कांग्रेस से नराज़ रहें, भारतीय जनता पार्टी से भी उनको कोई लगाव या जुड़ाव नहीं है।
अविन्द केजरीवाल और अन्ना का रास्ता भले ही एक है मगर लक्ष्य एक नहीं है ,अन्ना अब केजरीवाल और उनके आम आदमियों को सौ गज दूर से भी नहीं देखना चाहते।
"केजरीवाल कांग्रेस के साथ
अन्ना कांग्रेस के पास"।
वाह कांग्रेस!
एक तीर से कितने शिकार हुए?कोई बता सकता है?
अन्ना केजरीवाल से ऊपर रहेंगे,उनका एक अलग स्थान है सम्मान है। अब उसको बनाये रखने के लिए कांग्रेस को नयी जुगत लगानी है ,भाई लोगों को चित्त करने का एक अच्छा मौका है। पहले दोनों को लड़वा दिया। अब दोनों अपनी ही शरण में ,खिलाफ नहीं बोलेंगे। चुप रहेंगे , नीति से नियत बदल दी। सोच बदल दी। लक्ष्य मिटा दिए। सता दे दी। हाथ पकड़ कर चलना भी सिखाना ही पड़ेगा ,वर्ना रोज़ रोज़ यही होगा कि सरकार चलाने नहीं दे रहे ,अब कांग्रेस नहीं बोलेगी जो बोलेगा आम आदमी !
अरविन्द केजीवाल अब कांग्रेस की मदद से दिल्ली में सरकार बनाने की ओर अग्रसर हैं,कांग्रेस ने उनकी सारी शर्तें मान ली हैं और उन्हें कांग्रेस पर भरोसा भी हो गया है कि उसने जो शर्तें मानीं हैं उन पर वह वादे के मुताबिक कायम रहेगी!इसमें कोई हर्ज नहीं है कि जनता के पैसे कि बर्बादी रोकने के लिए अरविन्द केजरी वाल ने शायद देश और कांग्रेस पर एक अहसान कर दिया है। क्या इसे एक नया राजनितिक ध्रुवीकरण कहा जाए?राजनीति के विशषज्ञ तो यही कहेंगे,मगर मज़बूरी यह है इसे इसके अलावा और कहा भी क्या जा सकता है? अगर इसे गैर राजनीतिक चश्मे से दखा जाये तो मुझे लगता है कि यह आम आदमी की रोज़मर्रा की बात चीत में प्रयोग होने वाला एक और आम आदमी क मुहावरा भी है जो यहाँ एकदम सटीक बैठता है ,वह यह कि "जिसकी लाठी उसकी भैंस"! दिल्ली के चुनाव में निश्चित तौर भैंस तो केजरीवाल के पास थी ,यह अलग बात है भैंस के मालिक ने लाठी वाले को भैंस देने में कोई संकोच नहीं किया!
एक और उपलब्धि आप के नाम यह दिखायी दे रही है कि तथाकथित राजनीति के नाम पर लोकतंत्र में ऐसा भी गठबधन हो सकता है, जिसमे एक तरफ विचार ही न हो और दूसरी तरफ विचारों को गिरवीं रख लेने की महारत और लगभग ऐसी ही सोच से इतिहास भरा पड़ा हो,जिससे देश का बहुत बड़ा भाग सबक लेकर अनुकरण भी कर रहा है। मुझे अब यहाँ एक और सम्भावना अवश्यम्भावी दिख रही है ,जिसकोघटन से देर सबेर कोई रोक नहीं सकता ! आखिर जिसने शीला दीक्षित को चैन से बैठने नहीं दिया और नतीज़ा सरकार केजरीवाल के चरणों में आ पड़ी। उन्होंने सरकार को भी सहारा दे दिया। उनकी शर्तें मान ली गयी। मगर एक सबसे गंभीर मुद्दा बाक़ी है, वह यह कि कांग्रेस केद्र सरकार से सम्बंधित मुद्दे पर अन्य राजनितिक दलों से कैसे आप के लिए समर्थन जुटाएगी ,जो आपकी सरकार के लिहाज से दिल्ली राज्य के हक़ में है?और आप की सरकार उसको लागू करना चाहती है!
केजीवाल कि १८ शर्तों में यह कहीं नहीं लिखा है कि दिल्ली की शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली चली उस सरकार में जिसके खिलाफ एक मुद्दा उठाकर शीला दीक्षित की नाक में दम करने वाले अरविन्द केजरीवाल ने उन घोटालों पर अपनी नियत और रुख साफ़ नहीं किया है जिसके खिलाफ उन्हें बिजली के खंभों पर भी चढ़ना पड़ा और एक नहीं सैकड़ों और हज़ारों घोटाले और अनियमित कामहैं जिसकी जानकारी सम्पूर्ण रूप से मुझे तो नहीं हो सकती क्योकि दिल्ली सरकार के कामकाज की समीक्षा और नाप जोख का सारा काम लगभग सभी दलों ने ,जिसमे भाजपा मुख्य है केजरी वाल के नाम कर दिया था,तो अब केजरी वाल उन सारे घोटालों का क्या करेंगे?उनपर क्या रुख अपनाएंगे?उनकी जांच शीला सरकार के दौरान रहे अफसरों से करवाएंगे?या कोई और अफसर कहीं से लेंगे जो कि शीला दीक्षित या केद्र की कांग्रेस सरकार का अहसान मंद न हो और केजरीवाल की सोच वाला आम आदमी जैसा हो!
केजरी वाल की समर्थन के लिए कांग्रेस के सामने रखीं गयीं शर्तें!
Issue 1)
End of VIP culture in Delhi : No member of the Delhi Legislative assembly, minister of the Delhi government or government official would be allowed to use transportation with red beacons. He will not live in big bungalows and shall not ask for special security for himself. Every minister/ official should live like a common man.
दिल्ली सरकार का कोई विधायक या मंत्री लालबत्ती की गाडी में नहीं घूमेगा ,बड़े बड़े बंगलों और बिना सुरक्षा ताम झाम के आम आदमी के जैसे रहेंगे।
Issue 2)
A strong anti-graft Lokapal bill would be passed. It would amount to investigation of all the scams that the Congress and BJP have done till now in the Delhi government and the MCD.
एक मज़बूत लोकपाल बिल पास किया जायेगा जो अब तक भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की सरकार के घोटालों की जांच करेगा।
Issue 3)
The law of Swaraj will be enacted in Delhi. The right to take decisions about his Mohalla/colony/street will be given directly to the people. The councillor and MLA funds in Delhi would be discontinued. The money would be given directly to the Mohalla Sabhas so that the public decides on how to spend the money in its locality.
मोहल्ला समितीन बनायीं जाएंगी और पार्षदों तथा विधायकों कि विकास निधि समाप्त करके सीधे मिहला समितयों को पैसा दिया जायेगा और क्षेत्र की जनता खुद तय करेगी की पैसा कैसे खर्च करना है,और इसके लिए एक स्वराज कानून पास किया जायेगा।
Issue 4)
Delhi would be granted the status of a "Complete State"
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्ज़ा दिया जायेगा
Issue 5)
Compulsory audit of all electricity companies. The electricity bills would be slashed to half.
बिजली आपूर्ति कम्पनियों का आडिट अनिवार्य होगा और बिजली की दरें तुरंत आधी की जाएंगी।
Issue 6)
Every malfunctioning electricity meter in Delhi would be probed for irregularities.
बिजली के मीटरों में धांधली की जांच की जायेगी
Issue 7)
700 litres of clean water would be supplied daily to each and every house of Delhi.
दिल्ली के प्रत्येक नागरिक ७०० लीटर प्रतिदिन के हिसाब से पेयजल आपूर्ति की जायेगी
Issue 8)
All unauthorized colonies in Delhi would be regularized within a year and basic civic amenities would be provided to them.
एक साल के भीतर दिल्ली की सारी अनधिकृत कालोनियां अधिकृत कर दी जाएँगी।
Issue 9)
Jhuggis shall not be demolished till they people living there are provided with alternate houses.
वैकल्पव्यवस्था किये बिना दिल्ली की झुग्गी बस्तियों को गिराया नहीं जायेगा।
Issue 10)
Contract labour shall be abolished in services which are regular in nature. All jobs in such services shall be regularized.
नियमित वर्ग कि सेवाओं में काम कराहे ठेके के कर्मचारियों को एक साल के भीतर नियमित कर दिया जायेगा।
Issue 11)
The VAT taxes would be simplified and the VAT rates would be reassessed.
वैट का सरलीकरणकिया जायेगा और दरों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।
Issue 12)
Foreign Direct Investement will not be allowed in retail in Delhi.
खुदरा रिटेल कारोबार में दिल्ली के भीतर विदेशी निवेश नहीं किया जाएगा।
Issue 13)
All the services and subsidies which are given to the farmers of other states would be provided to the farmers of Delhi as well. Without the permission of the Gram Sabha, land acquisitions shall not take place. More areas in Delhi would come under the jurisdiction of the Gram Sabhas by the extension of Lal Dora.
अन्य राज्यों के किसानों की तरह दिल्ली कि किसानों को भी सभी सेवाओं पर अनुदानों का लाभ दिया जायेगा ,बिना ग्राम सभा की अनुमाति के भूमि अधिग्रहण असम्भव होगा ,इसके अलावा लाल डोरा के जरिये ग्राम सभा क्षत्रों का विस्तार किया जायेगा।
Issue 14)
Government schools will provide better education than private schools. More than 500 new government schools would be opened. The tradition of donations to private schools will be eliminated and there will be complete transparency in the fee structuring of private schools.
सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों के मुकाबले और अच्छी शिक्षा दी जायेगी।
Issue 15)
New government hospitals would be opened and government hospitals shall provide better healthcare than private hospitals.
सरकारी अस्पतालों में भी निजी अस्पतालों से अच्छी चिकित्सा सेवाएं दी जाएँगी।
Issue 16)
A special task force for the safety of Women will be established. New courts would be made and new judges appointed so that the redressal of cases related to Women Harassment takes place within 6 months.
महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला टास्क फोर्स बनायी जायेगी और महिलाओं के उत्पीड़न के के निस्तारण के लिए जजों की नियुक्ति की जायेगी जिनके जरिये छह माह के भीतर लम्बित मामलों का निस्तारण किया जायेगा।
Issue 17)
New judges to be appointed to facilitate the creation of fast track courts for these special courts mentioned above.
उक्त घोषणा पर अमल के लिए नए जजों की नियुक्ति की जायेगी।
Issue 18)
Other parties to support the Aam Aadmi Party in issues relating to central government.