शनिवार, 4 जनवरी 2014

अब बधाई के पात्र हैं मनमोहन सिंह !

प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह वाकई अब बधाई के पात्र हैं। उन्होंने देश की जनता को सन्देश दिया है। प्रकारांतर से यह स्पष्ट कर दिया है कि नरेंद्र भाई मोदी ही अब देश की बागडोर सम्हाल सकते हैं। इसके लिए उनकी आलोचना नहीं, उन्हें बधाई और धन्यवाद देने का मन है !प्रधानमन्त्री ने बहुत गम्भीर बात कही है। पहली बार भारत के किसी प्रधान मंत्री ने देश की इतनी गम्भीर चिंता की है। अब तक तो सब यही
कहते रहे कि देश की और ऊँगली उठाने वाला हाथ काट दिया जाएगा। यही पढ़ा और सुना था कि
 विदेशी ताकतों से देश को बहुत बड़ा ख़तरा है। प्रधानमन्त्री की देश के प्रति चिंता अब जागी तो उन्हें नरेंद्र मोदी नज़र आये। अब तो नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद देना चाहिए कि उनकी वजह से प्रधानमन्त्री को पहली बार देश की चिंता हुई! उन्हें लगने लगा कि जब अपनी जिम्मेदारी होते हुए भी वह देश की चिंता नहीं कर रहे हैं तो कोई तो करेगा ! नरेंद्र मोदी इस बात के लिए वह बधाई के पात्र फिर उन्होंने  ही प्रधानमन्त्री को यह अहसास करवा दिया कि उन्हें देश की चिंता करनी है।

ब  यह तो साबित हो गया कि नरेंद्र मोदी देश की चिंता में लगे हैं। और यह भी स्पष्ट  हुआ कि आधिकारिक तौर पर यह काम प्रधान मंत्री का है। और अब इस हालत में नरेंद्र मोदी यदि देश की बागडोर संभालने के लिए आगे आये हैं तो देश किसके हाथ में सुरक्षित है? इससे पूर्व यही प्रधानमंत्री यह कह और स्वीकार कर चुके हैं कि नरेंद्र मोदी उनके लिए चुनौती हैं! यहाँ तक तो ठीक था ,मगर अब यह बात देश तक आ गयी ,अपनी समस्या मनमोहन सिंह ने देश पर डाल दी ! अब जो प्रधानमन्त्री खुद अपनी चुनौती का सामना नहीं कर सकता ,और अपनी सुरक्षा के लिए देश को भयभीत करने लगे ,डराने लगे और कहे कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमन्त्री बने तो देश बर्बाद हो जायेगा ! इसका एक निहितार्थ यह भी है कि यही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात राज्य को और वहाँ की जनता को बर्बाद होते देखते रहने में जरा भी शर्म और गैरत नहीं महसूस कर रहे हैं ,और देश के मुखिया होने के नाते अपनी जिम्मेदारी का भी इन्हे जरा भी अहसास नहीं है। 

ड़े शर्म की बात है। अफ़सोस या तारीफ की जाए,यह अभी समझ में नहीं आ रहा है, क्योंकि प्रधानमन्त्री ने बड़ी साफगोई से कहा है कि वह सोनिया गांधी और राहुल गांधी से सलाह लेते हैं,उन्होंने यह नहीं कहा है कि वह कांग्रेस या उसके सहयोगी दलों की भी राय लेते है… !उन्होंने बेशर्मी से यह बात स्प्ष्ट कर दी कि वह एक परिवार के प्रति उत्तरदायी हैं देश या पार्टी के लिए नहीं।शर्म इसलिए आती है एक घरेलु नौकर की सोच वाला व्यक्तित्व देश की जिम्मेदारी सम्हाले बैठा है और देश को कुछ हाथों में बर्बाद होते भी देख रहा है। आखिर  गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं और प्रधानमन्त्री गुजरात के प्रति अपनी जिम्मेदारी समजह ही नहीं रहे हैं ,यह भी कहा जा सकता है कि जहाँ जहाँ बीजेपी की सरकार है वहाँ से उनका कोई मतलब नहीं,वह निश्चिन्त है !तारीफ की बस इतनी सी बात है कि उन्होंने खुलकर कह दिया कि वह क्या हैं ,और क्या कर रहे हैं! 

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