हमारी संस्कृति का ही हिस्सा है कि लोगों के मन बदलते हैा दिमाग बदलते हैं। सोचने का ढंग बदलता है। जब अच्छे लोगों की संगत होती है। यह हमारी ही संस्कृति की मिसाल हैं कि यहां डाकू वाल्मीकि धर्म की ध्वजा के ध्वजवाहक बने हैं। यदि कुदंन सिंह यह कह रहे है कि आप की टीम और उनके नायक अरविंद केजरीवाल के सघर्ष ने उनके सोचने का सलीका बदल दिया। उन्हें संघर्ष करने का सलीका सिखा दिया है। हमारा मन बदल गया है। अब हम समाज में आप के ध्वजवाहक बनकर लोगों की अपने बारे में बन चुकी धारणा को बदलना चाहते हैा तो उसे मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए। आप के ध्वजवाहक बनने के बाद भी यदि वह टीम केजरीवाल का सदस्य बनने लायक न हो तो इस फैसले पर जरूर सवाल उठाना चाहिए। तब शायद आपके साथ हम भी आपके हमसफर होंगे। यह इस देश का सौभाग्य है कि यहां के लोकतंत्र की जडें बापू ने सींचीं हैं।
एक फकीर जो गांधी बन गया उसकी सींचे हुए लोकतंत्र को अब देश के नौजवानों ने संभाल लिया है। उन नौजवानों ने जो कल तक राजनीति और राजनेताओं को घृणा की नजर से देखता था। यह नायक केजरीवाल का ही कमाल है कि उसने देश के नौजवानों की धारणा बदल दी। अब देश का नौजवान केजरीवाल का दीवाना हो गया है। अच्दा आप ही बताओं कल तक इस देश का नौजवान नेताओं के नाम पर नेतागीरी के नाम पर मुंह नहीं बिचकाता था। आज वहीं नौजवान आईआईटी, इंजीनियर डाक्टर पत्रकार अफसर नौकरी छोड छोड कर आप का झंडा थामने को निकल पडे हैं। सभी इस देश को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने के संघर्ष में आहूति डालने को लालायित है। संसद और विधानसभाओं के सदनों से इन चोर उचक्के लफंगे बेईमान और बदमाश समाजसेवक के खोल में बहरुपयिेयों को निकाल बाहर करने को उतावला है। यह कोई मिस्त्र नहीं है। यह गांधी का देश है। यहां खामोशी और अहिंसा से मूक क्रांति आती है। एसे में यदि किन्ही कारणों से बाहुबली बन गए।
ऐसे लोग भी यदि समाज के साथ कंधा मिलाकर चलना चाहें तो उन्हें साथ लेने में क्या और क्यों गुरेज होना चाहिए। नायक ने यह दिखा दिया है कि इस देश में आज भी बिना करोडों खर्च किए। बिना शराब बांटे, मंडल और कमंडल की राजनीति किए बिना भी चुनाव जीते जा सकते हैं। दोस्तों यह शुरूआत है। ऐसे में शुरू में ही यदि भरोसा टूट गया तो देश की राजनीतिक को स्वच्छ बनाने का मौका एक बार फिर हाथ से फिसल जाएगा। इसीलिए नायक केजरीवाल अपने मंत्रियों विधायकों से कह रहे हैं कि घमंडी मत हो जाना। कही ऐसा न हो कि तुम्हारे घमंड को चूर करने के लिए फिर किसी "आप" को आगे आना पडे। ऊपर वाले से बार बार प्रार्थना करने वाला लगता नहीं आडबंरी निकलेगा ।

टीम केजरीवाल के सदस्य कभी ऐसा होने नहीं देंगे। यह असम गण परिषद के छात्र नहीं, संघर्ष में तपकर निकली नौजवानी है। मुझे लगता है कि अन्ना के गुरुकुल के ये नगीने हैं। भले ही अन्ना आज किसी वजह से रूठे रूठे से हों , पर केजरीवाल दिल से अन्ना का चेलें हैं। हां ,सतर्क करते रहना भी जरूरी है । इसलिए यह सतर्कता में उठाया गया कदम है तो स्वागत किया जाना चाहिए। तब इसे उंगली उठाना नहीं आगाह करने की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। ऐसा है तो इसका दिल से स्वागत है।
*त्रिलोकी नाथ उपाध्याय
(त्रिलोकीनाथ उपाध्याय दैनिक जागरण में उप समाचार संपादक हैं,उनके फेसबुक वाल से )